सोनू निगम के जन्मदिन के मौके संगीतमयी शाम का आयोजन

प्रदूषण नियंत्रण जागरुकता का संदेश देते हुए संरक्षण हरित अभियान की ओर से गणमान्य लोगो को पौधे गिफ्ट किए गए।
(नई दिल्ली – ३० जुलाई २०१७ )  हिन्दी सिनेमा के सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक सोनू निगम अपने गानों से आज भी श्रोताओं के दिलों पर राज कर रहे है।  सोनू निगम के जन्मदिन के मौके पर दिल्ली के लोधी रोड स्थित इंडिया इस्लामिकसेंटर ओडिटोरियमे में एक् म्यूजिकल इवनिंग का आयोजन किया गया। ये आयोजन सोनू निगम के शिष्य संदीप मिश्रा ने किया। इस संगीतमयी शाम का हिस्सा बनने सैंकडों की संख्या में सोनू निगम के फैंस और संगीत प्रेमी जमा हुए।  संरक्षण हरित अभियान के फाउंडर चेयरमैन संजय पुरी ने इस मौके पर बोलते हुए कार्यक्रम में शामिल सभी लोगो से अपने हर जनमदिन पर पौधारोपण की अपील करते हुए कहा कि दिल्ली की आबोहवा में बढ़ता प्रदूषण हमारे सामने एक गम्भीर चुनौती है इस का मुकाबला मिलजुल के ही किया जा सकता है। इस दौरान आज की दिल्ली के  डायरेक्टर योगराज शर्मा ने न केवल संदीप मिश्रा बल्कि वहां मौजूद बहुत से वरिष्ठ संगीत जगत की हस्तियों जैसे सरोज मिश्रा और कई वरिष्ठजनो भी सम्मानित किया। इस मौके पर संरक्षण हरित अभियान के तहत सभी गणमान्य लोगो को पौधे गिफ्ट किए गए।
कार्यक्रम के आयोजक संदीप मिश्रा ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि सोनू निगम को सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के फिल्म फेयर पुरस्कार के साथ ही राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया। इस के अलावा आइफा पुरस्कार, ज़ी सिने पुरस्कार व स्टार स्क्रीन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है ।आमिर खान और शाहरुख खान जैसे नामचीन नायकों की आवाज कहे जाने वाले सोनू निगम ने तीन दशक से भी ज्यादा लंबे कैरियर में लगभग 320 फिल्मों के लिये गीत गाये है ।  सोनू निगम एक अच्छे कलाकार होने के साथ साथ एक अच्छे व्यक्तित्व के इंसान भी हैं। पार्श्वगायन के अलावा सामाजिक उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाते रहे है और कई कल्याणकारी संगठनों से सदस्य के रूप में जुड़े हुए है। इनमें कैंसर रागियों.कुष्ठ रोगियों और अंधों के कल्याण के लिये चलायी जाने वाली संस्था खास तौर पर उल्लेखनीय है। इसके अलावा सोनू निगम ने कारगिल युद्ध और भूकंप से पीड़ित परिवारों और बच्चों के उत्थान के लिये चलायी जाने वाली संस्था ..क्रेआन ..में भी सक्रिय योगदान दिया है।
देश भर से आये हुए नये गायकों ने सोनू निगम के सुपर हिट गानों को गा कर शाम को और हसीन बना दिया, कल हो न हो, कभी अलविदा न कहना, सूरज हुआ मद्धम, दो पल , इन लम्हों के दामन में,  भी मुझमें कहीं बाकि थोड़ी सी है ज़िन्दगी, संदेसे आते हैं प्रमुख है।

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