शाबाश इंडिया !! अंतरिक्ष विज्ञान में भारत अब तीसरे नंबर पर

अब भारत का अपना जीपीएस सिस्टम होगा,

अंतरिक्ष विज्ञान में भारत अब तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। भारत ने अब अपना स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम विकसित कर लिया है, यानी आप जिस विदेशी जीपीएस का इस्तेमाल करते रहे हैं, अब उसकी जगह आप मेड इन इंडिया नेविगेशन जीपीएस IRNSS का इस्तेमाल भी कर पाएंगे।
इसरो ने गुरुवार को अपने सातवें और आखिरी नेविगेशन सॅटॅलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इस सॅटॅलाइट का नाम Indian Regional Navigation Satellite System 1G है। आप इसे आम भाषा में देसी GPS Satellite भी कह सकते हैं। इस सिस्टम को भारत में औपचारिक तौर पर NAVIC यानी Navigation With Indian Constellation के नाम से जाना जाएगा।

– NAVIC 7 Satellites का एक समूह है जो ऊंचे हिमालय से लेकर गहरे समुद्र तक भारत की 7 आंखों की तरह काम करेंगे। लेकिन आपको शायद इस बात की जानकारी नहीं होगी कि हिमालय की रक्षा करने की ज़िद ने ही भारत को अंतरिक्ष की दुनिया में ये कामयाबी दिलाई है।

– आज से 17 वर्ष पहले जब पाकिस्तानी सेना कारगिल की ऊंची पहाड़ियों की आड़ लेकर भारत पर हमला कर रही थी, तब भारत ने अमेरिका से मांग की थी कि अमेरिका अपने GPS सिस्टम की मदद से पाकिस्तानी सेना की Postion की जानकारी भारत को दे, लेकिन अमेरिका ने ये जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया था, इसके बावजूद 17 साल पहले भारत ने हिमालय की पहाड़ियों में पाकिस्तान को कारगिल युद्ध में हरा दिया था और आज अंतरिक्ष में भारत ने अमेरिका के साथ बराबरी कर ली है।

– श्रीहरिकोटा से Polar satellite Launching Vehicle यानी PSLV – C 31 ने इस सैटेलाइट को लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर उड़ान भरी और फिर 20 मिनट के बाद इस सेटेलाइट को पृथ्वी की Orbit में स्थापित कर दिया गया।

– PSLV-C 31, PSLV लॉन्च सिस्टम का XL यानी Extra Large संस्करण है जो आंतरिक्ष में ज्यादा भार ले जा सकता है।

– भारत को नेविगेशन सिस्टम के मामले में आत्मनिर्भर होने के लिए कुल सात सेटेलाइट लॉन्च करने थे। इस कड़ी में ये सातवां सेटेलाइट है जो अगले 12 वर्ष तक काम करेगा।

– NAVIC नेविगेशन सिस्टम के तहत 7 सेटेलाइट्स लॉन्च करने में करीब 1420 करोड़ रुपये का खर्च आया है। जैसे ही सातवां सेटेलाइट काम करना शुरू करेगा भारत का देसी Navigation System अमेरिका के GPS सिस्टम जितना सटीक हो जाएगा।

NAVIC यानी Navigation With Indian Constellation सेना के साथ साथ आम नागरिकों के लिए भी उपलब्ध होगा, आम भारतीय नागरिक NAVIC की Standard Positioning Service इस्तेमाल कर पाएंगे जबकि इसका जो version सेना इस्तेमाल करेगी वो Encrypted होगा यानी आम लोगों के लिए प्रतिबंधित होगा।

– आम Mobile Phones में मौजूद GPS Reciever की मदद से भारत के लोग स्वदेशी Navigation system का इस्तेमाल कर पाएंगे।

– आपको ये जानकर गर्व होगा कि 7 स्वदेशी Navigation Satellites लॉन्च करने के बाद भारत दुनिया का पांचवा ऐसा देश बन गया है जिसके पास संपूर्ण रूप से अपना Navigation सिस्टम है।

– अभी अमेरिका के पास अपना Global Positioning System यानी GPS है। Russia के Navigation System का नाम ग्लोनास है।

– फ्रांस के Navigation सिस्टम का नाम है DORIS…. ये दूसरे satellite navigation systems से काफी अलग है। क्योंकि इसमें धरती से सैटेलाइट की तरफ सिग्नल भेजे जाते हैं.. जबकि दूसरे Navigation systems में सिग्नल, सैटेलाइट से धरती की तरफ भेजे जाते हैं। इसका इस्तेमाल मौसम और धरती में होने वाले बहुत छोटे बदलावों को Record करने के लिए भी किया जाता है क्योंकि इसकी Accuracy बहुत अच्छी होती है।

– यूरोपियन यूनियन भी अपने Navigation System..पर काम कर रहा है..जिसका नाम है Galileo. ये वर्ष 2020 तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा।

– भारत में अंतरिक्ष के क्षेत्र में commercial कामकाज ISRO के तहत काम करने वाली कंपनी Antrix Corporation Limited संभालती है, जिसकी स्थापना आज से 24 वर्ष पहले 1992 में की गई थी

– Antrix Corporation Limited अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों को अंतरिक्ष से जुड़ी सेवाएं और Products मुहैया कराती हैं।

– Antrix Corporation Limited का साल 2014-15 का Turnover 1860 करोड़ रुपये का था।

– Antrix के जरिए फिलहाल अंतरिक्ष के बाज़ार में ISRO का हिस्सा 3- से 4 प्रतिशत के बीच है लेकिन भारत का PSLV तेज़ी से दुनिया के दूसरे देशों की पसंद बनता जा रहा है।

– 1980 तक अंतरिक्ष के बाज़ार में अमेरिका का 100 प्रतिशत कब्ज़ा था जो अब घटकर 60 प्रतिशत रह गया है।

– 28 सितंबर 2015 को PSLV के ज़रिए ISRO ने पहली बार अमेरिका की एक कंपनी के 4 Satelites अंतरिक्ष में लॉन्च किए थे।

– ISRO ने इज़रायल, इटली, जापान, ब्रिटेन, स्विटज़रलैंड, टर्की और साउथ कोरिया जैसे देशों के Satelites भी अंतरिक्ष में भेजे हैं।

– भारत में जब अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी, तब रॉकेट साइकिल पर रखकर और उपग्रह बैलगाड़ी पर रखकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाए जाते थे।

Related posts

Leave a Comment