गोउ माता की रक्षा करना सरकार की कर्त्तव्य और दायित्व है: वेदा वेदान्ताचार्य स्वामी शिवात्मनंद

भारतवर्ष में हमे जो स्वतंत्र मिला है उसको आज कुछ लोग स्वेच्छाचार समझकर बहुत ही घिनौती काम करने लगे है। स्वतंत्र होना अच्छा है मगर स्वेच्छाचारी होना कानून के विरुद्ध है। “केरल में जो लोग गोउ माता की सबके सामने हत्या की है वोह बहुत ही निंदनीय है, यह आपने देश का परम्परा और संस्कृति को समग्र विश्व के सामने झुका दिया है“ – स्वामी शिवात्मनंद जी ने बताया ।
वेद में गोउ को माता के स्वरूप से बताया गया है । कैसे कोई इंसान आपने माता को ऐसे हत्या कर सकते है ? गोउ माता को हम सभी हिन्दू आराधना करते है । गोउ माता की शरीर में ३३ कोटि देवताओ का स्थान है इसीलिए हम हमेशा सबसे पहले उनका नमन करना चाहिए । गोउ को कभी भी पशु के रूप में नही देखना चाहिए । कभी भी हिन्दू भावनाओ को समझकर इस तरह से आघात नही करनी चाहिए ।
स्वामी जी ने बताया की कैसे भी हो गोउ माता की रक्षा होनी चाहिए । उन्होंने पुराण की बात करते हुए बताया की “जैसे गंगा हमारा माता है वैसे ही गोउ हमारा माता है” । इसीलिए गोउ माता की रक्षा करना, आदर करना, सम्मान करना, पूजा-आराधना करना हमारा कर्तब्य है और दायित्व भी। जो भी लोग हिन्दू भावनाओ के साथ इस तरह का आचरण करते है उनको कानुनात्मक रूप से विचार होना चाहिए, यह सरकार का दायित्व है ।

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