भारतीय शिल्प संस्कृति उपेक्षित हो रहा है – वेदान्ताचार्य स्वामी शिवात्मानंद महाराज

जिस भारतवर्ष को शिल्पकला मिला है, जी कला से मंदिर,  मोनुमेंट्स, जैसे बने है उस शिल्पकला को उस तरह से कदर नही मिल रहा है। सरकार को देखना चाहिए की यह भारतीय संस्कृति कैसे भी हो इनका बहुत अच्छे स्तर पर प्रगति होने चाहिए। जिस विश्वकर्मा समुदाय ने इस संस्कृति को आगे बड़ा रहे है उन समुदाय को मान सम्मान उस तरह से बिलकुल नही मिल रहे है जितना मिलना चाहिए। इतिहास की चर्चा करते हुए स्वामी शिवात्मानंद जी ने बताया की पुरातन समय में राजा अपने राज्य में शिल्पकारो को बहुत सम्मान देते थे और साथ साथ आरक्षण भी, मगर आज इस विश्वकर्मा समुदय को कोई भी मान सम्मान नही मिलता जहाँ भारतीय शिल्प, भास्कर्य-संस्कृति का परंपरा यह समुदय ने आगे बढ़ा रहे है जिस वजह से भारतवर्ष आज विश्व के दरवार में एक अलग पहचान से जाने जाते है ।

विश्वकर्मा कौन है? वेदान्ताचार्य स्वामी शिवात्मानंद महाराज ने बताया की भारत के जो इतिहास जो परम्परा जो संस्कृति है उसीमे इनका बहुत सारा वर्णन है। समग्र विश्व का सृष्टिकर्ता कौन है? आज हमे इतना सारे जो चमत्कार और दिव्य वस्तुओं दिख रहा है और इतना जो नए नए तकनीकी हमारे सामने है उसका पीछे कौन है? समग्र विश्व को बनाने के पीछे एक नीति है जो सृष्टि, स्तिथि,लय और समग्र उन्नति के कारन सिर्फ विश्वकर्मा भगवन है।

ऋग्वेद में परमात्मा विश्वकर्मा एक तत्व, एक चैतन्य के रूप में पाए जाते है। विश्वकर्मा ने सारा देवोताओ क सृष्टि करके उन्होंने इन्द्र, अग्नि, वायु, आदित्य,वरुण, सबका रचना किया। वेद में विश्वकर्मा परमात्मा ने सबका नामकरण किया है। इनमे पांच मुख है जो मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ नामसे जाने जाते है।

आज का प्रयुक्ति, आधुनिक विज्ञानं जिस तरह से प्रगति कर रहे है उस स्तर पर यह शिल्पकला का भी प्रगति मिले इसीलिए एक विश्वविद्यालय होनी चाहिए। जहाँ स्नातक से पिएचडी तक पढाया जाये। जैसे अगर देखा जाए आज हर एक के लिए सरकार योजना बना रहे है तो यह  पुरातन शिल्पकला को क्यूँ नही? यह भी तो हमारे भारतबर्ष के परम्परा है। मुझे उम्मीद है की भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी हमारा इस काम को सफल कराएँगे ।

यह मुद्दें को लेकर हमारा विस्वकर्मा समाज मोदी जे मिलने जायेंगे और उनसे मांग करेंगे की जिस तरह से हमारा शिल्पकला-संस्कृति नष्ट हो रहा है उसे वह पूर्ण रूपसे मर्यादा दे। क्यूँ की श्री नरेन्द्र मोदी भारतवर्ष का पहला प्रधानमंत्री है जिन्होंने विश्वकर्मा समाज को सर्वप्रथम शुभ सन्देश दिया इसीलिए उनसे हमारी सम्पूर्ण उम्मीद है की हमारा मांग पुरे करेंगे।

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